मदकोट

मदकोट


*मदकोट*
मुनस्यारी से २१ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पंचचुली से मदकनिया नदी आती है और मिलम से गोरी नदी ,जो मदकोट पे आ के मिल जाती है,कई लोगो का तो यह भी मानना भी है की गोरी नदी और मदकनिया नदी दोनों एक ही जगह से निकलती है मदकनिया नदी मिलम से हो के हिमालय के खंडो से हो के पंचचुली के तलहटी से मदकोट तक पहुचती है । मुनस्यारी से मदकोट जाने का मेरा अनुभव भी बड़ा अच्छा रहा,मुनस्यारी से पैदल नंदा देवी मंदिर के रास्ते निकल पड़ा जो की काफी रोमांच भरा था । पापड़ी ,पैकुती होते हुवे में किसी तरह रोड में पहुच गया और में वहां से मदकोट की तरफ निकल पड़ा । गोरी नदी के किनारे किनारे रोड पर में अकेला जा रहा था तभी एक गाड़ी वाला रुका और पूछा भुला योक्ले योक्ले का जानेहे ला (भाई अकेले अकेले कहां जा रहे हो) और मैंने जवाब दिया कि मैं बस मदकोट तक जा रहा हूँ गाड़ी वाले ने मुझे अपनी गाड़ी में आने को कहा लेकिन मैं पैदल ही निकल पड़ा प्राकृतिक नजारो का मज़ा लेते हुए। हमारी दिनचर्या वर्तमान युग में वाहनों से चलती है ,लेकिन हमें पैदल यात्रा भी करनी चाहिये । कछुवे की चाल से में मदकोट के पुल तक पहुंच गया और एक व्यक्ति से पूछने के बाद पुराने रास्ते से मदकोट के बाज़ार में प्रवेश किया । खाना खाने के बाद मैंने लोगो से पूछा की मदकोट में क्या ख़ास है देखेने लायक और उन्होंने बताया की थोडा आगे पे गरम पानी का स्रोत है ,जिसे लोकल वाले गंधक भी कहते है और एक छोटा सा झरना भी है जिसे फुग्गु झरना कहते है । में निकल पड़ा पहले झरने की तरफ और २-३ किलोमीटर पे झरना दिख गया झरना के पास एक मंदिर भी था आस पास जा रहे लोगो से पूछने पर पता चला की वह मंदिर जलदेवी का था। १० मिनट झरने को देखने के बाद में गरम पानी की ओर निकल पड़ा और जो की कुछ ही दुरी पर था गर्म पानी में नहाने के बाद में निकल पड़ा मदकोट की तरफ यह जानने के लिए की मदकोट में और क्या ख़ास है !और लोगो से पता चला की यहाँ मंदाकनी और गोरी नदी के किनारे शिवालय है जहाँ हर साल शिवरात्रि में मेले का आयोजन किया जाता है । लोगो ने यह भी बताया कि *"पंडित नैन सिंह रावत जी " * की पैतृक भूमि भी मदकोट ही है और यहाँ धारचूला मुनस्यारी विधानसभा के *विधायक माननीय हरीश धामी जी* का घर भी यहीं है ।

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