जय छिपाला केदार

जय छिपाला केदार

जय छिपला केदार

छिपला केदार जाने के लिया सबसे पहले सेराघाट से जाना पड़ता है ,जिन का ब्रतपन होना होता है उन को घर से ही नगे पाँव पैदल जाना पड़ता है, और अन्य श्रद्धालु चप्पल पहन कर जा सकते है,बिना ब्रतपन वालो को छिपाला केदार जाने की अनुमति नहीं होती है
     ब्रतपन वालो  घर से सफ़ेद कपडे पहनकर गले मे घंटी लगाकर ,भकोर बजाते हुवे छिपाला केदार की तरफ जाते रहते है ,रास्ते भर शंख बजाते हुवे जाते है और रास्ते मै देवी देवता भी अवतरित होते रहते है
सुबह खर्तोली से जाने पर शाम को ६ बजे तक छिपाला केदार पहुचते है ,
छिपाला केदार पहुचते ही जगतनाथ मन्दिर मै पूजा और आरती होती है और देवता अवतरित होते है और मन्दिर का दरवाजा वहा जाते ही बंद कर दिया जाता है ,जिसे बाद मै देवता खुद खोलते है और छिपाला केदार की पूजा करते है

मन्दिर मै कोई बाहरी सामन नही ले जा सकते मन्दिर मै चमरे का सामन ले जाना मना होता है , चाहे ओ पर्स या बेल्ट ही क्यों न हो
यहाँ तक की खाद्य सामग्री को भी ले जाना भी मनाही है ,फल को छोडकर ,
सभी लोग भानार (गुफा) मै रहते है  जिसमे नए ब्रतपण वाले अलग ही जगह दी जाती है  और लोगो के अलग जगह दी जाती है
 जो भी भनार से बाहर जाता है उसे नहा  के भनार मै आना पड़ता है

यहाँ खाने मै केवल पूरी और सब्जी बनती है वो भी केवल अन्वाल ही बनाते है (बकरी वाले  जो बकरी चराते है )  जो छोटे छोटे होटल खोले रखते है और वहा से खाना पड़ता है

नए ब्रतपन वालो को देवता आशीर्वाद देते है फिर बाल काटन शुरु कर देते है

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